गाइड

ब्रैंड पसंद

कंपनी के टूलबॉक्स में ब्रैंड पसंद एक कारगर टूल साबित हो सकता है. यहाँ बताया गया है कि इसका क्या मतलब है, यह क्यों ज़रूरी है, साथ ही इसे कायम करने के तरीके के बारे में टिप्स भी दिए गए हैं.

ब्रैंडिंग

हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को आसान बनाने की कोशिश करते हैं, इसलिए हम सभी की अपनी ब्रैंड पसंद होती हैं, जैसे कि हमें अपने बाल कटवाने के लिए कहाँ जाना है. ऐसी कॉफ़ी जो हमें दूसरों के मुकाबले कुछ ज़्यादा ही फ़ायदेमंद लगती है. ऐसा फ़्रोजन पिज़्ज़ा जो मूवी नाइट का सबसे बेहतरीन जोड़ीदार होता है. भले ही कस्टमर इस बारे में पहले से ही तय किए हुए होते हैं, लेकिन हम में से ज़्यादातर लोगों की ब्रैंड पसंद होती हैं—और इन्हीं बातों का हमारे कस्टमर के ख़रीदारी के सफ़र पर असर पड़ता है.

ब्रैंड पसंद क्या है?

ब्रैंड पसंद उसे कहा जाता है जब कस्टमर किसी प्रोडक्ट को पसंद करने लगता है और उस ब्रैंड को अपनी हमेशा की जाने वाली ख़रीदारी का हिस्सा बना लेता है. किसी कंज़्यूमर की ओर से दूसरे प्रोडक्ट आज़मा कर देखने के बाद ऐसा हो सकता है—वह प्रतिस्पर्धा में आज़माइश तो करता है लेकिन आखिरकार एक खास ब्रैंड पर जाकर रुक जाता है. उसकी वजहों में प्रोडक्ट की खासियतों से लेकर ब्रैंड की मैसेजिंग या फिर ब्रैंड की वैल्यू तक भी शामिल हो सकते हैं. ब्रैंड पसंद बनाने का मकसद ऐसे लॉयल कस्टमर तैयार करने वाला सीधा रिलेशनशिप कायम करना है, जो अपनी ख़रीदारी का फ़ैसला करते समय आपके ब्रैंड को टॉप ऑफ़ माइंड रखें.

ब्रैंड पसंद क्यों अहम है?

ब्रैंड पसंद से आपके कस्टमर बेस में स्थिरता लाने में मदद मिलती है. ब्रैंड पसंद वाले कंज़्यूमर की वजह से न सिर्फ़ आपके प्रोडक्ट को ज़्यादा बार चुने जाने का मौका मिलता है, बल्कि वे आपके ब्रैंड की तरफ़दारी भी कर सकते हैं, उनके ऐसा करने से दूसरे ऐसे कंज़्यूमर की पसंद को बदलने में मदद मिलती है, जो आज़माए जाने वाले ब्रैंड के बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कह सकते हैं.

इसके अलावा, ब्रैंड पसंद से असरदार अपर-फ़नल रणनीति के बारे में भी जानकारी मिल सकती है. मार्केटिंग फ़नल में, ऐसी कामयाब अपर-फ़नल रणनीति शामिल होती है जो कंज़्यूमर के साथ मायने रखने वाले इंटरैक्शन के ज़रिए ब्रैंड के बारे में जागरूकता पैदा कर सके. ब्रैंड के सामने एक सबसे बड़ी रुकावट यह होती है कि वे जिन लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं उनका ध्यान अपनी तरफ़ खींच सकें और यह तय कर सकें कि उनका ब्रैंड लोगों के लिए विज़िबल है और उन्होंने इसे अपना लिया है. अगर आप ऐसे लेवल की ब्रैंड विश्वसनीयता पैदा करते हैं जिसके साथ ब्रैंड पसंद भी जुड़ी हुई हो, तो इससे सिर्फ़ यही पता नहीं चलता है कि आपके ब्रैंड के बारे में जागरूकता बढ़ी है, बल्कि यह भी पता चलता है कि कंज़्यूमर आपके ब्रैंड को लेकर इतने संतुष्ट हैं कि वे कस्टमर के ख़रीदारी के सफ़र के दौरान उसे ही पहले नंबर पर रखते हैं.

इसके अलावा, ब्रैंड पसंद कायम हो जाने के बाद ही कोई जाना-पहचाना ब्रैंड इस काम को कर सकता है, यानी, ख़ुद को एडवरटाइज़ करना. चाहे ऐसा किसी यादगार ब्रैंड इमेज के ज़रिए हो, कस्टमर सर्विस के बारे में अच्छा एक्सपीरिएंस रहा हो या संभावित कस्टमर के मन में बस जाने वाला ब्रैंड के नाम की वजह से हुआ हो, इन मामूली बातों के चलते ब्रैंड पसंद बनती है, इन्हीं की वजह से आगे आने वाले नामों को मार्केटप्लेस में कामयाब होने में मदद मिलती है.

आप ब्रैंड पसंद को किस तरह से मापते हैं?

ऊपर बताई गई बातों के मुताबिक, मार्केटिंग से जुड़ी कोशिशों पर गौर करना ज़रूरी है क्योंकि वे ब्रैंड के बारे में जागरूकता की रणनीतियों का हिस्सा हैं: क्या चीज़ कारगर साबित हो रही है, क्या नहीं और किस चीज़ को बेहतर बनाया जा सकता है.

ब्रैंड पसंद को मापना ऐसे स्टार्ट-अप और उभरते ब्रैंड के लिए मायने रखता है जो अपनी ब्रैंड वैल्यू को समझने की कोशिश कर रहे हैं. ब्रैंड पसंद को मापने का पहला कदम यह आकलन करना है कि एडवरटाइज़िंग कितनी कुशलता से लोगों का ध्यान आपके ब्रैंड की ओर खींच रही है.

Amazon Ads की ओर से Amazon Attribution ऑफ़र किया जाता है ताकि ब्रैंड के गैर-Amazon मीडिया के असर को Amazon पर मापा जा सके. ब्रैंड, इंडस्ट्री मेजरमेंट के अहम पार्टनर के ज़रिए अपने Amazon Ads कैम्पेन से जुड़े ब्रैंड पसंद, जागरूकता और ब्रैंड को आगे बढ़ाना जैसे कामों को भी तय कर सकते हैं. Amazon Marketing Cloud (AMC) एडवरटाइज़र को ऐसे मार्केटिंग टच पॉइंट की सीक्वेंस को समझने के और भी तरीके मुहैया कराता है जिनका असर दिखाई देता है और उनकी ऑडियंस को सबसे असरदार ढंग से एंगेज करने के तरीके के बारे में हर तरह की जानकारी देने वाला व्यू बिल्ड करता है.

आप ब्रैंड पसंद को किस तरह से बढ़ा सकते हैं?

ब्रैंड पसंद कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रातों-रात कायम किया जा सके, लेकिन जागरूकता पैदा करने, कस्टमर के साथ बातचीत करने और हमेशा काम करते रह कर ब्रैंड पसंद कायम करने में कामयाबी पाई जा सकती है.

1. ब्रैंड के बारे में जागरूकता के साथ आगे रह कर काम करें

ब्रैंड बिल्डिंग किसी भी ब्रैंड के लिए ब्रैंड पसंद बनाने का अहम कदम है. अगर कंज़्यूमर को आपके ब्रैंड की मौजूदगी की जानकारी नहीं है, तो आप किसी भी तरह की ब्रैंड पसंद नहीं बना पाएँगे. दूसरे सभी मौजूदा ब्रैंड के बीच आपके ब्रैंड के लिए क्या अवसर हैं, इसे पहचानने के लिए मार्केट रिसर्च ही एक अच्छी शुरुआत है. आपका ब्रैंड असल मार्केट में कितनी हिस्सेदारी की उम्मीद कर सकता है?

अपने ब्रैंड के यूनीक हिस्सों को हाइलाइट करने वाली मज़बूत मार्केटिंग रणनीति तय करने से कस्टमर को यह समझने में मदद मिलेगी कि उन्हें आपके खास प्रोडक्ट को क्यों आज़मा कर देखना चाहिए. अपने ब्रैंड की पहचान के नज़रिए से मायने रखने वाली चीज़ों को पहचानना बेहद ज़रूरी है—अगर यह ब्रैंड की वैल्यू हैं, तो उस पर खास ध्यान दें. अगर यह नई बातें बताने वाले सोशल मीडिया की मौजूदगी है, तो उसे हाइलाइट किए जाने का खास ध्यान रखें. सबसे अहम बात, वैल्यू दिखाने के लिए तैयार रहें और अपने किए गए किसी भी क्लेम का बैकअप लें.

2. कस्टमर के साथ बातचीत करते रहें

कंज़्यूमर जानकार और सामाजिक सोच वाले होते हैं, वे ब्रैंड के वायदे और उसे लेकर उनकी ओर से किए जा रहे काम दोनों पर गौर करते हैं. कस्टमर की विश्वसनीयता कायम करने का मतलब यह है कि आप अपने ब्रैंड के वायदे पर खरे उतरते हैं. टेक्नोलॉजी ने सभी बाधाओं को तोड़ दिया है और दुनिया भर के लोगों को जोड़ा है, जिससे कंज़्यूमर को ग्लोबल लेवल पर और ज़्यादा जानकारी मिल रही है. उन्हें मौसम में बदलाव का असर दिखाई दे रहा है. इसलिए, वे अपनी आदतों और ख़रीदारी करने के तरीकों को बदलने के बारे में नए सिरे से सोच रहे हैं. सबके लिए समान अधिकारों वाला समाज बनाने की उम्मीद में कई कंज़्यूमर, सामाजिक न्याय के लिए चल रहे आंदोलनों को सपोर्ट कर रहे हैं.1

कंज़्यूमर ब्रैंड के यूनीक और अक्सर गहरे असर के बारे में भी जानते हैं. इस तरह से उन्हें सभी ब्रैंड की ओर से काफ़ी कुछ किए जाने की उम्मीद है. दुनिया भर के कई कंज़्यूमर, ब्रैंड से पहले से ज़्यादा सहानुभूति और मानवता की उम्मीद कर रहे हैं. साथ ही, वे उनसे मुनाफ़े और समाज में कारगर योगदान के बीच संतुलन बनाने के लिए भी कह रहे हैं.2

कस्टमर से सही समय पर वैल्यू-आधारित मैसेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट मैसेजिंग के हिसाब से बातचीत कर पाने से उनके साथ तालमेल कायम करने में मदद मिलती है. नतीजतन, उस ब्रैंड के एंगेजमेंट से आगे चल कर ब्रैंड ट्रस्ट कायम करने में मदद मिल सकती है और सीधी रिलेशनशिप ब्रैंड पसंद और विश्वसनीयता में बदल सकता है.

3. हमेशा काम करते रहें और बैलेंस बनाने के लिए तैयार रहें

बैलेंस बनाए रख पाना एडवरटाइज़िंग और कस्टमर की ज़रूरत दोनों पर कारगर साबित होता है. ब्रैंड को हमेशा अपने कस्टमर के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए, इस दौरान उसे कस्टमर के फ़ीडबैक पर पूरा ध्यान देना चाहिए. यह दिखाता है कि कस्टमर के प्रति प्रतिबद्धता से लंबा रास्ता तय किया जा सकता है.

एडवरटाइज़िंग और ज़्यादा ब्रैंड विजिबिलिटी बनाने के मामले में, Amazon Ads की ओर से ब्रैंड के बारे में जागरूकता को मापने के कई तरीके ऑफ़र किए जाते हैं, जैसे कि ब्रैंड में नया के मेट्रिक. Sponsored Brands ब्रैंड में नया मेट्रिक के ज़रिए ऐसी यूनीक रिपोर्टिंग देते हैं, जिससे आपको पिछले 12 महीनों में मिलने वाले नए कस्टमर की कुल संख्या या पहली बार की कुल बिक्री को मापने में मदद मिलती है.

यह जानते हुए कि कई गैर-Amazon चैनल कस्टमर की ख़रीदारी के सफ़र में भूमिका निभाते हैं, आप Amazon Attribution के ज़रिए यह इनसाइट पा सकते हैं कि आपका ब्रैंड या प्रोडक्ट नई ऑडियंस तक कैसे पहुँचे. कंसोल की मदद से आप सर्च, सोशल, वीडियो, डिस्प्ले और ईमेल में अपनी एडवरटाइज़िंग के मेजरमेंट को एक साथ ला सकते हैं. सभी टच पॉइंट पर अपनी डिजिटल एडवरटाइज़िंग के असर को समझ कर आप जागरूकता को बेहतर तरीके से बढ़ा सकते हैं और अपने ब्रैंड मार्केटिंग के लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.

Amazon Attribution की मदद से AMC और कैम्पेन मेजरमेंट के बारे में ज़्यादा जानकारी पाएँ.

1-2 Environics Research, “Amazon Ads | सोशल वैल्यू ग्लोबल कंज़्यूमर थीम,” US, UK, ES, FR, DE, IT, 2021