एक्सपर्ट की सलाह
ऑडियंस का सफ़र कभी भी सीधी दिशा में तय नहीं होता. आपकी मीडिया खरीदारी भी नहीं होनी चाहिए.
26 मार्च, 2026 | मैट मिलर, सीनियर कॉन्टेंट मैनेजर
आज के दौर में ऑडियंस का ध्यान लगातार बदलता रहता है. वे एक ही समय में अलग-अलग स्क्रीन, मोमेंट और अलग-अलग मूड के बीच तालमेल बिठाते हुए चलते हैं. कोई व्यक्ति जो Prime Video पर Thursday Night Football देख रहा है, वह साथ ही Twitch पर गेम थ्रेड में भी एक्टिव हो सकता है. इस साल बड़े मैच के दौरान, खिलाड़ी Twitch पर लाइव आकर अपने 'गेम-डे लुक्स' पर चर्चा कर रहे थे, जबकि लाखों लोग इस ब्रॉडकास्ट को देख रहे थे. या फिर उस दर्शक के बारे में सोचिए जो लिविंग रूम में अपने कनेक्टेड TV पर कोई ड्रामा सीरीज़ देखना शुरू करता है, सोने से पहले उसे टैबलेट पर आगे देखता है और अगली सुबह अपने फ़ोन पर उसे पूरा करता है, वही कहानी, बिना किसी रुकावट के हर स्क्रीन पर उस तक पहुँचती है.
सफल एडवरटाइज़र ने चैनल खरीदना बंद कर दिया है और अब वे ऑडियंस खरीद रहे हैं, उनके पूरे दिन के दौरान और उनके पास यह साबित करने के लिए ज़रूरी इंफ़्रास्ट्रक्चर भी मौजूद है कि यह तरीका काम कर रहा है. फ़्रेगमेंटेशन ही सबसे बड़ी चुनौती है और इसे सुलझाने का मतलब है ऑडियंस तक वहाँ पहुँचना जहाँ पर वे मौजूद हैं, यह मापना कि असल में क्या हो रहा है और हर टचपॉइंट को उन नतीजों से जोड़ना जो वास्तव में मायने रखते हैं.
फ़्रेगमेंटेशन में चुनौती, परिभाषा
सालों तक, स्ट्रीमिंग, लाइव स्पोर्ट्स, सोशल और ऑडियो जैसे अलग-अलग तरीकों से ऑडियंस तक पहुँचने का मतलब था, आपस में नहीं जुड़ी हुई खरीद के एक बेमेल जाल को मैनेज करना; जिनमें से हर एक के अपने अलग-अलग प्लानिंग टूल, रिपोर्टिंग डैशबोर्ड और मेज़रमेंट के तरीके होते थे. जो कैम्पेन मीडिया प्लान में एक जैसे और एकदम ताल में दिखते थे, वे अक्सर लागू करते समय जटिल हो जाते थे, उनके सिग्नल आपस में तालमेल नहीं बिठा पाते थे और उनके नतीजों से कुछ समझ पाना मुश्किल हो जाता था.
यह सिर्फ़ कामकाज के खर्च तक सीमित नहीं है. जब मीडिया को खरीदना अलग-अलग हिस्सों में बँटा होता है, तब आपकी यह समझ भी बँट जाती है कि वास्तव में क्या काम कर रहा है. रीच की दोहरी गिनती हो जाती है. फ़्रिक्वेंसी मैनेज नहीं हो पाती है. और वे मोमेंट, जिनमें ब्रैंड और परफ़ॉर्मेंस एक-दूसरे को मज़बूत कर सकते थे, पूरी तरह से हाथ से निकल जाते हैं.
ग्लोबल एजेंसी और ग्लोबल Twitch ऐड की डायरेक्टर सारा इयूस का कहना है कि अलग-अलग फ़ॉर्मेट, सर्विस और रिपोर्टिंग में फ़्रेगमेंटेशन को संभालना, असल में काफ़ी समय और रिसोर्स की माँग करता है. हमारा ध्यान इस पूरी प्रोसेस को ’प्लानिंग से लेकर मेज़रमेंट तक आसान बनाने पर है, ताकि एजेंसी
फिर से बेहतर नतीजे लाने पर फ़ोकस कर सकें.
ऑडियंस से वहीँ से मिलना जहाँ वे असल में हैं
फ़्रेगमेंटेशन को सुलझाने का मतलब अपने चैनल को कम करना नहीं है. ऑडियंस असल में प्रीमियम स्ट्रीमिंग, लाइव स्पोर्ट्स, कनेक्टेड TV, ऑडियो और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म पर फैली हुई हैं और जो ब्रैंड इन सभी जगहों पर अपनी मौजूदगी बनाए रखते हैं, वे ही खरीदारी का फैसला लेने के पूरे समय के दौरान ऑडियंस के मन में सबसे असरदार तौर पर बने रहते हैं.
जो बदला है, वह है, इन सभी के बीच योजना बनाने और उन्हें मापने के लिए उपलब्ध इंफ़्रास्ट्रक्टर. Amazon Ads के साथ, एडवरटाइज़र अब अपनी खुद की सर्विस और वर्चुअल तौर पर लगभग सभी दूसरे प्रीमियम पब्लिशर, यानी जहाँ भी ऑडियंस जाती हैं, तक एक ही जगह से पहुँच सकते हैं. Amazon DSP Prime Video, Twitch, Fire TV और प्रीमियम थर्ड-पार्टी पब्लिशर जैसे Netflix, Disney, Spotify, Roku को खरीदने की एक ही जगह में एक साथ लाता है. इससे एजेंसी को
सप्लाई को अलग-अलग मैनेज करने के बजाय, चौतरफ़ाStreaming TV कैम्पेन की प्लानिंग, उन्हें शुरू करने और उन्हें मेज़र करने में मदद मिल जाती हैं. कंप्लीट टीवी इससे भी आगे जाता है: एडवरटाइज़र Amazon और थर्ड पार्टी के पब्लिशर, दोनों पर अपने स्ट्रीमिंग इंवेस्टमेंट को एक साथ ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं, और पूरे लैंडस्केप को एक ही नज़रिए से देख सकते हैं.
इस पूरी प्रोसेस को Amazon का ऑथेंटिकेटेड ग्राफ़ चलाता है, जो एडवरटाइज़र को अमेरिका के 90% घरों से जोड़ता है. 1यही वजह है कि इसकी मेज़रमेंट स्टोरी इतनी सटीक और भरोसेमंद है. जब Streaming TV इम्प्रेशन, लाइव स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप और Display ऐड, ये सभी एक ही जगह पर चल रहे हों, तो आप उन्हें आपस में और उनसे मिलने वाले नतीजों से जोड़ सकते हैं.
"आप पाँच अलग-अलग डैशबोर्ड से जानकारी इकट्ठा करके यह उम्मीद नहीं कर रहे होते कि सब कुछ सही बैठ जाए," इयूस ने कहा. "वेरिफाइड सिग्नल की वजह से ये हो पाता हैं और कस्टमर के साथ यह बातचीत, 'यह रहा हमारा सबसे अच्छा अनुमान' कहने से बिल्कुल अलग होती है."
अपनी ऑडियंस के साथ आगे बढ़ना
जो ब्रैंड इसे अच्छी तरह से संभाल रहे हैं, वे चैनल के हिसाब से नहीं सोच रहे हैं. वे हर मोमेंट के बारे में सोच रहे हैं: मेरी ऑडियंस सबसे ज़्यादा कब एंगेज होती हैं, वे क्या कर रहे होते हैं, और मैं उनके सामने इस तरह से कैसे आऊँ जो उस कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से सही हो?
लाइव स्पोर्ट्स यहाँ बेहतर लेंस है. Prime Video पर Thursday Night Football का मैच देखने वाली ऑडियंस, कई मामलों में वही ऑडियंस होती हैं जो Twitch पर भी एक्टिव रहते हैं, सफ़र के दौरान ऑडियो स्ट्रीम करते हैं और उसी शाम बाद में कनेक्टेड TV पर ब्राउज़ करते हैं. ऐसी मीडिया रणनीति, जो इनको अलग-अलग खरीद के तौर पर देखती है, उन ऑडियंस तक दिन भर में बार-बार पहुँचने से एक साथ पड़ने वाले गहरे असर को नज़रअंदाज़ कर देती है.
"Amazon की अपनी और थर्ड पार्टी इन्वेंट्री का इस्तेमाल करके, हम ऑडियंस के साथ उनके पूरे सफ़र के दौरान एक ही, मेल खाती बातचीत बनाए रख पाते हैं," Skai के कॉमर्स मीडिया के VP, केविन वीस ने कहा. "सब कुछ एक 'भाषा' में जोड़कर, हमने आम ऑपरेश में आने वाली मुश्किल को दूर कर दिया है, जिससे हमारे क्लाइंट को पूरे फ़नेल में हर टचपॉइंट का तय और साबित होने वाला असर दिखाना बहुत आसान हो गया है."
एक ही जगह खरीदारी से उस पूरी प्रोसेस का प्लान बनाना आसान हो जाता है, न कि सिर्फ़ अलग-अलग प्लेसमेंट का और अलग-थलग मोमेंट के बजाय पूरे सफ़र को मेज़र किया जा सकता है.
अब इसका क्या मतलब है
फ़्रेगमेंटेशन खत्म होने वाला नहीं है. असल में, प्रीमियम स्ट्रीमिंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है, इसमें ज़्यादा इन्वेंट्री, ज़्यादा फ़ॉर्मेट और ज़्यादा ऐसे मोमेंट शामिल हो रहे हैं जो ऑडियंस का ध्यान खींचने के लिए आपस में होड़ कर रहे हैं. एडवरटाइज़र के लिए सवाल यह नहीं है कि उन्हें उन सभी जगहों में मौजूद रहना चाहिए या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि क्या ऐसा आसानी से करने के लिए ज़रूरी इंफ़्रास्ट्रक्टर मौजूद है.
"जब आप इन सभी चीज़ों को एक साथ लाते हैं, तो आप न सिर्फ़ खरीदारी को आसान बना रहे होते हैं, बल्कि आप मीडिया इनवेस्टमेंट और बिज़नेस के नतीजों के बीच सीधा जुड़ाव भी बना रहे होते हैं," इयूस ने कहा. यह उस तरह की पार्टनरशिप है जो असल में हमारे शेयर होने वाले कस्टमर के लिए फ़र्क पैदा करती है.
अब ऐसे टूल मौजूद हैं जिनकी मदद से आप चौतरफ़ा प्लान बना सकते हैं, अपने और थर्ड-पार्टी सप्लाई के ज़रिए उसे लागू कर सकते हैं और नतीजों को एक ही जगह पर माप सकते हैं. उन मार्केटर के लिए, जिन्होंने सालों तक अलग-अलग रिपोर्ट को मिलाने और रीच का अंदाज़ा लगाने में बिताए हैं, यह कोई छोटी बात नहीं है. ऑडियंस तेज़ी से आगे बढ़ जाती हैं और उन ब्रैंड के बीच का फ़ासला, जो उनके साथ तालमेल बिठा पाते हैं और जो अब भी अलग-थलग होकर काम कर रहे हैं, लगातार बढ़ता ही जा रहा है.
सोर्स
1 Amazon आंतरिक डेटा, 2025