मार्केटिंग मिशन की कामयाबी और संतुलित KPI की ज़रूरत

01 नवंबर, 2021 | इन्होंने लिखा: ब्रेंडन फ्लैहर्टी, लेखक, ब्रैंड कॉन्टेंट

माय बेस्ट एडवाइस,’ एक सीरीज़ है. इसमें एडवरटाइज़िंग एक्सपर्ट अपने करियर के दौरान सीखी गई मुख्य लर्निंग शेयर करते हैं. इसके साथ ही, वे खुद को मिली सबसे बेहतरीन सलाह और इनसाइट भी शेयर करते हैं जिससे अन्य लोगों को अपने ब्रैंड और बिज़नेस को आगे बढ़ाने में मदद मिले.

Publicis ईवीपी, एमी लान्ज़ी, संतुलन पर बहुत ध्यान देती हैं—चाहे वो डेटा का इस्तेमाल करके क्लाइंट को एक व्यू पाने और मार्केटिंग के लिए संतुलित अप्रोच बनाने में मदद करना हो; शार्ट-टर्म बढ़त और बिक्री और लॉन्ग-टर्म ब्रैंड इक्विटि के बीच संतुलन बनाना हो; या फ़िर काम और जीवन के बीच संतुलन के लिए उनकी सोच "उन सभी चीज़ों को मैनेज करना जिनकी हमें परवाह है.”

एमी अपने परिवार के अलाव जिस चीज़ की परवाह करती है वह है कॉमर्स. वह उत्तरी अमेरिका में Publicis Groupe के कॉमर्स से जुड़े कामों को लीड करती है. इसमें इस क्षेत्र के लिए प्रोडक्ट और टैलेंट डेवलपमेंट शामिल है. पूरे ग्लोबल Publicis नेटवर्क में मौज़ूद कॉमर्स से जुड़े काम करने वाली कंपनी जैसे, Spark Foundry, Starcom, Arc, Saatchi & Saatchi X और Zenith को आपस में जोड़ना और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करना भी इनकी ज़िम्मेदारी है.

Publicis से जुड़ने से पहले, उन्होंने 20 साल से ज़्यादा Omnicom की रिटेल मार्केटिंग एजेंसी TPN के साथ काम करके उसे आगे बढ़ाया है. अपने पूरे करियर के दौरान, वह रिटेल बिज़नेस को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाने और उपभोक्ता किस चीज़ को ध्यान में रखकर ख़रीदारी करते हैं, इस क्षेत्र में काम करती रही हैं.

जीवन और काम करने के प्रति अपनी अप्रोच में वह उनके पिता जी की ओर से दी गई एक सलाह को बहुत गंभीरता से लेती हैं—हर दिन जीतने के लिए है. वह कहती हैं, “आप हर दिन सबसे अच्छी PowerPoint प्रेजेंटेशन बनाकर या मीटिंग में अच्छी बातें रखकर या 5000 कदम चलकर हर दिन एक नई जीत दर्ज़ कर सकते हैं. मतलब आप हर दिन अपना बेस्ट दें और किसी भी तरह की बर्बादी ना होने दें—फ़िर चाहे वो समय की बर्बादी हो या ऊर्जा की.”

इस फ़िलॉसोफ़ी की मदद से वह अपने क्लाइंट को प्राथमिकता देने और ब्रैंड से जुड़े ज़रूरी विषयों पर उन्हें और भी बेहतर तरीके से गाइड कर सकीं. जैसे: ऑडियंस के साथ अच्छी तरह से कैसे जुड़े.

एडवरटाइज़िंग की मदद से कैसे ब्रैंड और उपभोक्ता को आपस में अच्छी तरह से जोड़ा जा सकता है?

किसी भी ब्रैंड से हमारा लगाव उसकी कहानी और वे किस तरह से कस्टमर के साथ व्यवहार करते हैं, इन दो चीजों पर निर्भर करता है. एडवरटाइज़िंग के शुरूआती दिनों से लेकर आज तक इसमें बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन जो चीज़ बदल गई है वो है खरीदारी की तरफ़ कस्टमर को लाने और जल्दी खरीदारी करने का तरीका. ब्रैंड के पास अब ऐसे तरीके हैं जिससे वो कस्टमर को जल्दी यह एहसास करवा सकते हैं: “वाह, मैंने अभी कुछ नया देखा है;” से लेकर: “अब मैं इसे खरीदने जा रहा हूं” तक पहुंचा सकते हैं.”

कोविड से पहले, मैं न्यूयॉर्क शहर के ट्रांजिट म्यूजियम गया और वहां मैंने कुछ पुराने ऐड देखे जो सबवे और बसों पर लगे होते थे. वहां बहुत सारी अजीब और पुरानी हेडलाइन थीं, जैसे: “एक टोपी पहनने वाले आदमी वह व्यक्ति है जिससे एक महिला शादी करना चाहेगी.” वाह. लेकिन कुल मिलाकर, इसने मुझे एहसास कराया की उस समय लोगों के पास बहुत समय था.

आज हम हर समय नया कॉन्टेंट देखते हैं. ऐसे में कॉन्टेंट की इस भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए, ब्रैंड को कस्टमर के साथ इमोशनल तौर से जुड़ना होगा और लगातार उन्हें ब्रैंड से जुड़ी कहानियां बतानी होगी, ताकि वे कस्टमर के मन में लॉन्ग-टर्म वैल्यू बना सकें. यहां यह बात सबसे ज़रूरी हो जाती है कि ब्रैंड किस तरह से ऑडियंस के सामने नए और अनोखे तरीके से सही कॉन्टेंट पेश कर करते हैं, ताकि वे इससे एंगेज कर सकें.

ब्रैंड से जुड़ी कहानियां कैसे एडवरटाइज़र के मन में लॉन्ग-टर्म वैल्यू डेवलप करती हैं?

ग्लोबल बेबी ब्रैंड के साथ काम करने के दौरान मैं इसे पूरी तरह से समझ चुका था. हमने माता-पिता बनने के सफर को अच्छी तरह से समझा और हमें पता चला पूरी दुनिया में यह सभी के लिए एक जैसा ही होता है. इसलिए, यह समझना वाकई दिलचस्प हो गया था कि पहली बार मां बनने वाली महिलाएं क्या खरीदना पसंद करती हैं और वे इसके लिए किस ब्रैंड को चुनती हैं.. हमने पाया कि एक खास ऑडियंस ने उन ब्रैंड को चुनना पसंद किया जिन्होंने ऐड कॉन्टेंट और कहानियों की मदद से उन्हें आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास दिया. इसमें चीज़ों को इस्तेमाल करने की प्रेरणा तो शामिल है ही, लेकिन मुख्य रूप से वही ब्रैंड अच्छा परफ़ॉर्म कर रहे थे जो लोगों को यह एहसास करा पाए कि उनके प्रोडक्ट खरीदने वाले कस्टमर अच्छे माता-पिता साबित होंगे.

ऊंचे लेवल पर, उपभोक्ताओं की इच्छाओं और ज़रूरतों को समझना और उन्हें उसके हिसाब से संबंधित कॉन्टेंट डिलीवर कराना बहुत ज़रूरी है. इससे कस्टमर ब्रैंड से जुड़ाव महसूस करते है और जीवन के इमोशनल पलों में ब्रैंड और उसके प्रोडक्ट खरीदते हैं.

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एमी लान्ज़ी, उत्तरी अमेरिका कॉमर्स लीड, Publicis Groupe

इनसाइट की मदद से कैसे ब्रैंड और असरदार तरीके से ऑडियंस तक पहुंच बना सकते हैं?

ऑडियंस इनसाइट की मदद से ब्रैंड स्मार्ट तरीके से उपभोक्ताओं के पैसिव पलों की जानकारी भी पा सकते हैं. जैसे, जब वे टीवी स्ट्रीम कर रहे हों. ऑडियंस और मेजरमेंट स्टैंडपॉइंट से मिले फ़ीडबैक के आधार पर अब हमें अपनी डिजिटल एडवरटाइज़िंग पर बहुत ज़्यादा भरोसा है. मेरा मतलब है कि Amazon की मदद से आप यह समझ सकते हैं कि उपभोक्ताओं की दुनिया किस तरह से काम करती है.

अगर आप स्मार्ट तरीके से Amazon Ads का इस्तेमाल करते हैं, तो आप यह समझ पाएंगे कि कैसे आप बहुत ही जल्द Thursday Night Football गेम का लुत्फ़ उठा रहे किसी उपभोक्ता को उस दौरान एक ऐड दिखाकर आलू के चिप्स खरीदने पर मजबूर कर सकते हैं. अगर आप सही क्रिएटिव का इस्तेमाल करके ऐसा कर पा रहे हैं, तो आप और व्यापक कैनवस को देख पाएंगे जिससे आप अपना बिज़नेस और भी आगे बढ़ा सकेंगे. इसे अच्छी तरह से करने के लिए, ब्रैंड को पारंपरिक मार्केटिंग फ़नल के बारे में न सोचकर मिशन के तौर पर अपनी रणनीति बनानी चाहिए.

हम अभी भी “फ़ुल-फ़नेल” शब्द का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन मैं इसका इस्तेमाल ज़रूरत के हिसाब से करती हूं, क्योंकि मैं कॉमर्स के क्षेत्र में काम करती हूं. मैं पार्टनर को इसका इस्तेमाल करने की सलाह देती हूं, क्योंकि जब Amazon जैसी रिटेल मीडिया की बात आती है, तो उन्हें फ़ुल-फ़नेल सोल्यूशन डिलीवर करना होता है. हालांकि, पारंपरिक मीडिया के सिद्धांतों और हमने फ़ुल-फ़नेल अनुभव को पहले जैसे देखा था, उसकी तुलना में यह चीज़ों को देखने का दूसरा तरीका हो सकता है.

मार्केटिंग मिशन क्या होता है?

मिशन में मुख्य रूप से वो उद्देश्य शामिल होते हैं जो ब्रैंड किसी कस्टमर के लिए तय करते हैं. जैसे, स्कूल खुलने पर की जाने वाली शॉपिंग, हर हफ़्ते के किराने के सामान की खरीदारी या बर्थडे पार्टी की प्लानिंग. आपको वाकई में कस्टमर की पसंद को ध्यान में रखकर सब कुछ करना होगा: वह मिशन किस तरह का होगा? साथ ही, इस मिशन को सफल बनाने के लिए कस्टमर से कौनसे काम कराने होंगे? मुझे लगता है कि आपको इसी तरह से प्लानिंग करनी चाहिए. आपको मिशन में उपभोक्ता के खरीदारी के करीब पहुंचने से पहले ही उसकी मानसिकता को समझना होगा. साथ ही, आपको यह भी समझना होगा पूरे प्रोसेस के दौरान आप उन्हें अपने साथ कैसे जोड़े रख सकते हैं.

जब आप मिशन और उसे पूरा करने के लिए किए जाने वाले सभी कामों के बारे में सोचते हैं, तब आप मिशन को पूरा करने के और करीब आ जाते हैं, जैसे: “ठीक है, मुझे किस तरह की ऑडियंस को ध्यान में रखकर काम करना है? सच में स्थिति कैसी है?” और फिर, “मैं कैसे इन सेगमेंट और खरीदारी के समय का फ़ायदा उठाकर अपने बिज़नेस को आगे बढ़ा सकता हूं?"

मुझे लगता है कि आज भी पारंपरिक फ़नल अप्रोच बहुत ज़्यादा सोच समझकर की जाने वाली खरीदारी पर अप्लाई होती है. ज़्यादातर लोग अपने पूरे जीवन में 17 कारें नहीं खरीद रहे हैं, है ना? यह जीवन की अलग-अलग स्टेज पर भी अप्लाई होती है. जैसे, अगर आपके बच्चे कॉलेज जाते है या आप ऐसे माता-पिता है जिनके बच्चे उनके साथ नहीं रहते, तो आप कुछ खास प्रोडक्ट खरीदेंगे. इसलिए, इन संभावनाओं तक पहुंचना ज़रूरी हो जाता है. सामान्य तौर पर उपभोक्ता, प्रोडक्ट खोजने, खरीदने, खरीदने पर विचार करने और अन्य चीजों के बीच बहुत तेज़ी से आगे बढ़ते हैं.

ब्रैंड को अपनी मैसेजिंग के मिशन में कैसे शामिल करना चाहिए?

मैं आपको एक उदाहरण से समझाता हूं. क्या आप चाहेंगे कि आपका बहुत अच्छा दोस्त आपसे हर समय बात करता रहे, नहीं ना? सोचिए, आपका कोई दोस्त SMS से आपसे लगातार बात करता रहे. दरअसल, "मुझे लगता है कि यही हो रहा है," बार-बार या आपको जूते के लिए लगातार अपडेट भेजे जा रहे हैं. देखिए मैं कभी भी जूते के 2000 जोड़े नहीं खरीदूंगा. इसलिए, अब रूक जाइए. मुझे परेशान करना बंद करिए. अब आप SMS भेजने वाले उसी दोस्त की तरह हो गए हैं. अगर मिशन के तौर पर देखें, तो ज़्यादातर लोग जूते साल में कुछ बार और किसी खास समय पर ही खरीदते हैं. इसका मतलब है कि ब्रैंड को बहुत सोच समझकर और खास मकसद के लिए अपने कस्टमर और संभावित कस्टमर को इस तरह के मैसेज भेजने चाहिए.

साथ ही, इसका कस्टमर की ज़रूरत के साथ मेल खाना भी ज़रूरी है. नहीं तो, आपके मैसेज का क्या मतलब है? “अरे, आपके पास पैर हैं. क्या आप जूते खरीदना चाहते हैं?” इसे एक बेहतरीन कस्टमर अनुभव नहीं माना जाएगा. इसलिए, आपके प्रोडक्ट से ज़्यादा उपभोक्ता को मिलने वाला कस्टमर अनुभव ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है. क्योंकि, अगर इसे सही तरह से किया गया है, यह ऑडियंस को अपनी ओर लाता है और इसका कॉन्टेंट भी आकर्षक है, तो बनाए गए संबंधित मैसेज और सुझावों को ऑडियंस देखना पसंद करेगी और ये उनके लिए मददगार साबित होंगे.

बिज़नेस के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए मेजरमेंट कितना ज़रूरी है?

अगर आप इसे माप नहीं सकते, तो आपके लिए आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो जाएगा. मेजरमेंट बहुत ज़रूरी होता है—खास तौर पर उस क्षेत्र में जहां मैं काम करती हूं. इसकी मदद से क्लाइंट अपनी मार्केटिंग की पारंपरिक अप्रोच को ज़रूरत के मुताबिक बदल सकते हैं. इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है.

मुझे यह भी लगता है कि यह ज़रूरी है कि मेजरमेंट अप्रोच में मुख्य परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) संतुलित हों. अगर आप इस मेट्रिक को माप रहे हैं कि ब्रैंड को लोग कितना पसंद करते हैं, तो ये आपके लिए फायदेमंद साबित नहीं होगी. ख़ास करके हायर-लेवल मैनेजमेंट में तो बिलकुल भी नहीं. साथ ही, आप किसी ब्रैंड मेट्रिक का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और आपका पूरा फ़ोकस सिर्फ़ बिक्री पर है—तो इस तरह की जानकारी ज़्यादातर चीफ़ मार्केटिंग अफसर के काम नहीं आएगी. ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि उनका काम समय के साथ ब्रैंड बनाना होता है न कि सिर्फ़ बिक्री बढ़ाना.

अच्छी तरह से सोच समझकर तय किए गए KPI बहुत ज़रूरी हैं. नहीं तो आपको कुछ इंटरनल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और आप पूरे मिशन पर ध्यान नहीं दे पाएंगे. बिक्री के साथ-साथ ब्रैंड इक्विटि भी ज़रूरी है. आप इनमें से किसी एक को नहीं चुन सकते. हर चीज़ पर ध्यान देना ज़रूरी है. चौतरफ़ा तौर पर देखा जाए, तो यह हर चीज़ के बीच संतुलन बनाने के बारे में है.